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सामाजिक संगठनो में लोकतंत्र स्थापित करने हेतु प्राथमिक तौर पर निर्धारित कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव कराये जाना चाहिए

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l  सामाजिक संगठनो में लोकतंत्र स्थापित करने हेतु प्राथमिक तौर पर प्रत्येक सामाजिक संगठन को समाज के लोगो द्वारा निर्मित और सोसाइटी रजिस्ट्रार से पंजीकृत विधान के अनुसार निर्धारित कार्यकाल समाप्ति के बाद समय पर किसी न किसी रूप में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ चुनाव कराना चाहिए । जिसमे प्रतिनिधि मतदाता द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार संगठन की शासन व्यवस्था को नियंत्रित और बदल सकते हैं ।

अब महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि सामाजिक संगठन का प्रतिनिधि सदस्य कैसे बनाया जाता है ? वर्तमान पद्धति में जो प्रतिनिधि सदस्य बनाये जाते है उनसे वार्षिक/आजीवन शुल्क लेकर प्रतिनिधि सदस्य बना दिए जाते है l जिसमे ये कहीं भी घोषित नहीं है कि एक प्रतिनिधि सदस्य कितने सामाजिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है l एक ही घर/परिवार में से सारे लोग शुल्क देकर प्रतिनिधि सदस्य बन जाते है जो न्यायोचित नहीं है l

कुछ समाजशास्त्रियों और प्रबुद्धजनो का मत है कि प्रतिनिधित्व के सिद्धान्त के अनुसार सामाजिक प्रतिनिधि सदस्य एक ऐसा व्यक्ति होता है,जो कुछ लोगो के समूह का प्रतिनिधित्व करता है और संगठन में प्रतिनिधि की भूमिका निभाता है । इस तरह जब संगठन में चुनाव होता है तो कुल प्रतिनिधि वोटर X एक प्रतिनिधि द्वारा प्रतिनिधित्व लोगो की संख्या=कुल सामाजिक लोगो की जनसँख्या का पता लग जाता है l मान लो एक प्रतिनिधि 10 लोगो का प्रतिनिधित्व करता है और अमुक समाज के सामाजिक संगठन के कुल प्रतिनिधि सदस्य 5,000 है तो उस अमुक समाज की जनसँख्या 50,000 आंकी जाएगी l जबकि अमुक समाज के दस लाख लोग क्षेत्र में निवास करते है l ऐसी स्थिति में सामाजिक संगठन को अमुक समाज का सर्वमान्य संगठन नहीं माना जायेगा, जो अपने आप को समस्त अमुक समाज का संगठन घोषित करते है l

लोकतंत्र शब्द बोलने में छोटा है परंतु इसका अर्थ उतना ही बड़ा और जटिल निकलता है । इस समय सामाजिक संगठनो में सुधारों की तत्काल आवश्यकता है, जिसमे संगठन के चुनाव सुधारों पर जनमत संग्रह, विभिन्न सामाजिक संगठनो के बीच समन्वय और समाज में अधिक पारदर्शी व उत्तरदायित्वपूर्ण सामाजिक प्रणाली की स्थापना का प्रावधान शामिल हो l लोकतंत्र व्यवस्था में जो संगठन समाज के लोगो की आवाज को दबाता या रोकता है, वह वैध नहीं है, वह लोकतंत्र के प्रावधानों का उल्लंघन है ।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के लिए समाजहित एक्सप्रेस किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

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